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Swine Flu (H1N1) बच्चों में: लक्षण, खतरे के संकेत और बचाव के तरीके
घर में बच्चा हो तो साल में दो-तीन बार खांसी-जुकाम होना कोई नई बात नहीं। ज्यादातर बार हम इसे ज्यादा तवज्जो भी नहीं देते “ठंड लग गई होगी” या “मौसम बदल रहा है” कहकर टाल देते हैं। लेकिन कभी-कभी यही मामूली सा दिखने वाला बुखार असल में Swine Flu यानी H1N1 निकल जाता है। और सच कहूं तो शुरुआत में इसे पहचान पाना इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि दिखने में यह बिल्कुल सामान्य फ्लू जैसा ही लगता है।
फर्क बस इतना है कि अगर बुखार दो-तीन दिन से ज्यादा खिंच जाए, या बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से बहुत ज्यादा चुपचाप और सुस्त हो जाए, तो वहीं थोड़ा अलर्ट हो जाना चाहिए। नीचे मैंने कोशिश की है कि जो भी जरूरी बातें एक पेरेंट को पता होनी चाहिए, वो सीधी-सादी भाषा में बता दूं।
Swine Flu आखिर होता क्या है
स्वाइन फ्लू असल में एक वायरल इन्फेक्शन है, जिसे H1N1 वायरस फैलाता है। नाम में “स्वाइन” इसलिए जुड़ा क्योंकि यह वायरस सबसे पहले सुअरों में पाया गया था लेकिन अब यह बात पुरानी हो चुकी है, अब यह इंसानों से इंसानों में भी उतनी ही आसानी से फैलता है जितना कोई भी आम फ्लू फैल जाता है। यही वजह है कि लोग अक्सर इसे साधारण सर्दी-जुकाम समझकर टाल देते हैं, जबकि असल में उसे थोड़ा गंभीरता से लेने की जरूरत होती है|
बच्चों में यह कैसे दिखना शुरू होता है
हर बच्चे में लक्षण बिल्कुल एक जैसे नहीं होते, पर कुछ चीजें आम तौर पर देखने को मिलती हैं:
- बुखार, जो अक्सर तेज होता है और आसानी से नहीं उतरता
- खांसी जो रुकने का नाम नहीं लेती
- गले में खराश या दर्द
- नाक बहना या बंद रहना
- शरीर में दर्द की शिकायत
- हद से ज्यादा थकान बच्चा खेलना-कूदना छोड़कर बस लेटा रहना चाहता है
किन संकेतों को हल्के में बिल्कुल न लें
अब बात करते हैं उन संकेतों की, जिन्हें देखकर देर नहीं करनी चाहिए | क्योंकि ये बताते हैं कि मामला अब हाथ से निकल सकता है।
बड़ों के लिए ये संकेत खतरे की घंटी हैं:
- सांस फूलना या सांस लेने में साफ तौर पर दिक्कत महसूस होना
- सीने में दर्द या भारीपन
- अचानक चक्कर आना, या बातों का ठीक से समझ न आना
- उल्टियां जो किसी तरह रुक ही न रही हों
- तेज बुखार के साथ शरीर में गजब की कमजोरी
- सांस तेज या मुश्किल से चलना
- होंठ, चेहरे या त्वचा का रंग नीला या पीला पड़ जाना
- पानी या दूध पीने से साफ मना करना
- पेशाब बहुत कम या न के बराबर आना
- बच्चे का ठीक से उठ न पाना, या जगाने पर भी न जागना
- बुखार के साथ शरीर पर दाने या चकत्ते निकल आना
Flu वैक्सीन लगवाना कितना जरूरी है
यह मानना ही पड़ेगा कि वैक्सीन आज भी फ्लू से बचने का सबसे भरोसेमंद जरिया है। पर उम्र के हिसाब से डोज़ का हिसाब-किताब थोड़ा अलग है, तो इसे समझ लेना ठीक रहेगा।
अगर बच्चा 6 महीने से 8 साल के बीच का है और पहली बार यह वैक्सीन लगवा रहा है, तो ज्यादातर मामलों में उसे 2 डोज़ चाहिए होती हैं | और दोनों डोज़ के बीच कम से कम 4 हफ्तों (28 दिन) का फासला रखा जाता है, ताकि शरीर को इम्यूनिटी बनाने का पूरा मौका मिल सके। वहीं
9 साल से बड़े बच्चों और वयस्कों के लिए आमतौर पर सिर्फ एक डोज़ ही काफी होती है। एक और बात जो अक्सर लोग भूल जाते हैं | यह वैक्सीन हर साल दोबारा लगवानी पड़ती है, क्योंकि वायरस खुद अपना रूप बदलता रहता है, तो पुरानी वैक्सीन उतनी असरदार नहीं रहती।
गर्भवती महिलाएं भी डॉक्टर से पूछकर यह वैक्सीन लगवा सकती हैं, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। और हां, बच्चे को पहले कब-कब वैक्सीन लगी है, उसी हिसाब से अगली डोज़ और समय तय होता है | इसलिए यह अंदाजा लगाकर खुद तय करने वाली बात नहीं, पीडियाट्रिशियन से बात करके ही आगे बढ़ें।
अगर बच्चा 6 महीने से 8 साल के बीच का है और पहली बार यह वैक्सीन लगवा रहा है, तो ज्यादातर मामलों में उसे 2 डोज़ चाहिए होती हैं | और दोनों डोज़ के बीच कम से कम 4 हफ्तों (28 दिन) का फासला रखा जाता है, ताकि शरीर को इम्यूनिटी बनाने का पूरा मौका मिल सके। वहीं
9 साल से बड़े बच्चों और वयस्कों के लिए आमतौर पर सिर्फ एक डोज़ ही काफी होती है। एक और बात जो अक्सर लोग भूल जाते हैं | यह वैक्सीन हर साल दोबारा लगवानी पड़ती है, क्योंकि वायरस खुद अपना रूप बदलता रहता है, तो पुरानी वैक्सीन उतनी असरदार नहीं रहती।
गर्भवती महिलाएं भी डॉक्टर से पूछकर यह वैक्सीन लगवा सकती हैं, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। और हां, बच्चे को पहले कब-कब वैक्सीन लगी है, उसी हिसाब से अगली डोज़ और समय तय होता है | इसलिए यह अंदाजा लगाकर खुद तय करने वाली बात नहीं, पीडियाट्रिशियन से बात करके ही आगे बढ़ें।
Swine Flu से बचाव के आसान तरीके
- हाथ बार-बार साबुन-पानी से धोते रहें
- खांसते-छींकते वक्त मुंह-नाक ढकना न भूलें
- जो बीमार है, उससे थोड़ी दूरी बनाकर रखें
- घर में हवा आने-जाने का रास्ता बना रहने दें, खिड़कियां बंद करके न बैठें
- बच्चों को भीड़ में मास्क पहनने की आदत डालें
इलाज के लिए कहां जाना चाहिए
अगर घर में किसी को, खासकर बच्चे को, ऊपर बताए गए लक्षण दिख रहे हों, तो देर न करें और किसी अनुभवी डॉक्टर से जल्द जांच करवा लें। बच्चों के मामले में यह और भी जरूरी है, क्योंकि उनकी हालत बड़ों के मुकाबले जल्दी बिगड़ सकती है।
गोरखपुर में रहने वाले पेरेंट्स के लिए इतना कहूंगा जहां भी इलाज करवाएं, यह जरूर देख लें कि वहां जांच-टेस्ट की सुविधा हो, डॉक्टर बच्चों के इलाज में अनुभवी हों, और इमरजेंसी में तुरंत मदद मिल सके। अगर बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या असामान्य सुस्ती दिखे, तो देर किए बिना गोरखपुर के किसी भरोसेमंद बाल रोग विशेषज्ञ से मिल लें।
गोरखपुर में रहने वाले पेरेंट्स के लिए इतना कहूंगा जहां भी इलाज करवाएं, यह जरूर देख लें कि वहां जांच-टेस्ट की सुविधा हो, डॉक्टर बच्चों के इलाज में अनुभवी हों, और इमरजेंसी में तुरंत मदद मिल सके। अगर बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या असामान्य सुस्ती दिखे, तो देर किए बिना गोरखपुर के किसी भरोसेमंद बाल रोग विशेषज्ञ से मिल लें।
निष्कर्ष
स्वाइन फ्लू सुनने में जितना डरावना लगता है, समय पर पहचान लिया जाए तो उतना मुश्किल नहीं रहता। ज्यादातर बच्चे सही देखभाल और सही इलाज से जल्दी संभल जाते हैं। बस खतरे के संकेतों को नजरअंदाज न करें, उम्र के हिसाब से वैक्सीन का शेड्यूल फॉलो करते रहें, और जब भी मन में कोई शक हो, बिना झिझक अपने पीडियाट्रिशियन से बात कर लें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। बच्चे के इलाज या वैक्सीनेशन से जुड़ा हर फैसला हमेशा डॉक्टर की सलाह लेकर ही करें।
FAQs
बच्चों में स्वाइन फ्लू कितने दिन में ठीक हो जाता है?
ज्यादातर बच्चे सही देखभाल और डॉक्टर की सलाह वाली दवाओं से 5-7 दिन के अंदर ठीक हो जाते हैं। पर यह पूरी तरह बच्चे की उम्र, इम्यूनिटी और इलाज की शुरुआत कितनी जल्दी हुई, इन पर निर्भर करता है।
अगर बच्चे को पहले फ्लू वैक्सीन लग चुकी है, तो क्या फिर भी 2 डोज़ चाहिए होंगी?
नहीं, अगर बच्चे को पहले भी फ्लू वैक्सीन लग चुकी है, तो आमतौर पर एक ही डोज़ काफी होती है। 2 डोज़ की जरूरत मुख्य रूप से उन बच्चों को पड़ती है जो पहली बार यह वैक्सीन लगवा रहे हैं और उम्र 6 महीने से 8 साल के बीच है।
क्या गर्भवती महिलाओं को स्वाइन फ्लू का खतरा ज्यादा होता है?
हां, गर्भावस्था के दौरान शरीर की इम्युनिटी थोड़ी कमजोर हो जाती है, इसलिए संक्रमण का खतरा और उसकी गंभीरता दोनों बढ़ जाते हैं। इसी वजह से डॉक्टर अक्सर गर्भवती महिलाओं को भी फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं।
बच्चे को स्वाइन फ्लू है या सामान्य जुकाम, यह कैसे पता चलेगा?
सच कहूँ तो शुरुआत में फर्क कर पाना मुश्किल है, दोनों एक जैसे ही लगते हैं। बस इतना ध्यान रखें | अगर बुखार 2-3 दिन में भी नहीं उतर रहा, या बच्चा हद से ज्यादा सुस्त हो गया है, तो डॉक्टर को दिखा देना ही सही रहेगा। घर पर टेस्ट करने या अनुमान लगाने की कोशिश न करें।
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